आमलेट
बचपन से सुनता आया हूँ,
धरती है,
अंडे के जैसी गोल,
आज पता चला,
हमारे रोज का हासिल भी,
अंडा है,
उठना, ब्रश करना,
नहाना, आफिस जाना,
थकना, खाना और सो जाना,
हर दिन वही क्रम दोहराना,
जैसे सिसाइफस का,
पत्थर लेकर,
ऊपर जाना- नीचे आना,
असल मुश्किल तो ये है कि,
अभी आया नही मुझे,
आमलेट बनाना.......
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